Tuesday, April 9, 2019

मोदी के विकास पर क्या कहते हैं उत्तराखंड के गांवों के मुसलमान और सिख: ग्राउंड रिपोर्ट

वे ठेठ गढ़वाली बोलते हैं और रहन-सहन भी बिल्कुल पहाड़ियों सरीखा. पहाड़ की रीति रिवाजों में ऐसे रच बस गए हैं कि किसी के लिए भी ये अंदाज़ा लगाना क़त्तई आसान नहीं कि वो सिख हैं या मुसलमान.

उत्तराखंड में पौड़ी गढ़वाल में ऐसे ही तक़रीबन आधा दर्जन गांव हैं, जहाँ बहुसंख्यक आबादी सिख या मुसलमान हैं. मुसलमानों का ऐसा ही एक गांव है कोटद्वार से तक़रीबन 30 किलोमीटर दूर. नाम है रामा गांव.

गांव मुख्य सड़क से तक़रीबन 150 मीटर नीचे है, लेकिन रास्ता खोज-खोजकर जाना पड़ता है. 'नज़र हटी कि दुर्घटना घटी'.

गांव में घुसते ही दूसरा घर गांव की प्रधान रज़िया बेगम का है. इससे पहले कि उनसे दुआ-सलाम होती, दरवाज़े पर उनके पिता मोहम्मद सईद अहमद ने हमारा परिचय लिया और फिर बोले (मानो वो अपनी परेशानी बताने के लिए किसी का इंतज़ार कर रहे थे).

बोले, "मैं 74 साल का बूढ़ा हूँ. ये रास्ता ऐसा है कि जे गिर जाए न तो सीधे गदेरे (बरसाती नदी) में पड़ेगा. आपने तो देख लिया, ख़ुदा न करे किसी का..."

उन्होंने कहा, "मेरी तो पैदाइश ही यहाँ की है. (ग़ुस्से में) भाषण दे रहे हैं न, डिजिटल गांव बना हुआ है. एक लड़की दो साल पहले यहाँ गिरकर मर गई, अभी तक वो रास्ता नहीं बना. मैं दिल्ली जाऊंगा और मोदी जी को दिखाऊंगा कि कितना विकास हुआ है. मेरी लड़की प्रधान है, मैं ज़्यादा नहीं बोल सकता."

रज़िया बेगम पांच साल पहले निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गांव की प्रधान चुनी गई थी. रज़िया बेगम के दो बेटे हैं और दोनों ही कई साल पहले नौकरी करने के लिए दिल्ली चले गए. गांव में लगभग हर परिवार की यही कहानी है. कुछ मकानों पर ताले लटके हैं (जिनका पूरा परिवार गांव से पलायन कर गया है).

रज़िया कहती हैं, "रोज़गार नहीं है, कभी इस गांव में 350 के लगभग मुसलमान परिवार रहते थे, लेकिन अब 250 परिवार ही अपने घरों में रह रहे होंगे."

उज्जवला स्कीम समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने को लेकर भी प्रधान समेत गांववालों में ग़ुस्सा है.

रज़िया कहती हैं, "उज्जवला में तीन दफ़े 45 लोगों के फ़ॉर्म भरे, लेकिन मिला सिर्फ़ चार को. कनेक्शन भी मुफ्त नहीं है 1617 रुपये की रसीद मिली है. अब हाल ये है कि जिन्हें सिलेंडर नहीं मिला वो हर दूसरे-चौथे रोज़ मुझे खरी-खोटी सुना जाता है और कहता है- अब तू भी तो मोदी वाली हो गई है."

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों में उज्जवला स्कीम की सफलता का ज़िक्र करते हैं और दावा करते हैं कि इस स्कीम से देशभर के एक करोड़ से अधिक परिवारों को फ़ायदा हुआ है.

गांव में शौचालय तो ख़ूब बने हैं, लेकिन लोगों की शिकायत है सरकार ने जो 12 हज़ार देने का वादा किया था, वो इक्का-दुक्का लोगों को छोड़कर किसी को नहीं मिला.

अब्दुल रहीम टेलरिंग का काम करते हैं और उनका मकान पिछले साल टूट गया था और अब वो एक छोटे से कमरे में गुज़र-बसर कर रहे हैं.

अब्दुल कहते हैं, "मैं झूठ नहीं बोलूंगा, किसान सम्मान निधि का दो हज़ार मुझे मिला है (वो मोबाइल में 11 मार्च को बैंक से आया मैसेज दिखाते हैं), गेहूं-चावल (खाद्य सुरक्षा योजना) भी मिल रहा है, लेकिन शौचालय का पैसा अब तक नहीं मिला. रही मकान की हालत तो वो आप देख ही रहे हो."

बतुला बेगम, ज़ैबुन्निसा बेगम की भी यही पीड़ा है. गांव में साल 1836 में बनी एक मस्जिद है, पर ये भी नाज़ुक हालत में है.

प्रधान रज़िया बेगम कहती हैं, "मुझे पता चला है कि धरगांव समेत कई आस-पास के गांवों में मंदिर बनाने के लिए सरकार ने अनुदान दिया है. मस्जिद के बाहरी क्षेत्र (इबादतगाह के लिए अनुदान की इजाज़त नहीं है) की मरम्मत के लिए सरकार हमारी भी मदद कर सकती थी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली."

गांव का कोई भी व्यक्ति खुलकर तो नहीं कहता, लेकिन इशारों-इशारों में बताता है कि सरकारी योजनाओं को लागू करने में उनके गांव के साथ भेदभाव किया जाता है.

अब्दुर्रहीम कहते हैं, "पिछली बार बीजेपी को वोट दिया था कि मोदीजी कुछ करेंगे लेकिन कुछ नहीं हुआ."

उत्तराखंड में 11 अप्रैल को लोकसभा की पाँचों सीटों के लिए वोट डाले जाने हैं.

पौड़ी लोकसभा सीट से बीजेपी ने पूर्व विधायक तीरथ सिंह रावत को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता रहे भुवन चंद्र खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी पर दांव लगाया है. मनीष खंडूरी हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

सरकार से नाराज़गी को छोड़ दें तो रामा गांव के मुसलमानों को अपने हिंदू पड़ोसियों से कोई शिकवा-शिकायत नहीं है.

सईदा बेगम, साइरा बेगम समेत कई महिलाएं एक सुर में कहती हैं, "पूरा भाईचारा है. हम एक-दूसरे के घर आते हैं. चाय-पानी, खाना-पीना साथ होता है. एक-दूसरे के शादी-विवाहों हम जाते हैं. दुख में एक आवाज़ में सब साथ होते हैं."

रामा गांव से तक़रीबन 60 किलोमीटर दूर गढ़वाली सिखों का अनूठा गांव है हलूणी.

हलूणी मुख्य सड़क से तक़रीबन दो किलोमीटर दूर है और गांव को जोड़ने के लिए कच्ची सड़क बने हुए भी तीन साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक ये पक्की नहीं हुई है.

हलूणी में एक गुरुद्वारा है और 90 फ़ीसदी से अधिक सिख धर्म को मानने वाले हैं.

इस गांव में लगभग 60 परिवार सिख नेगी हैं, गांव में कुल मिलाकर 85 परिवार हैं.

हालाँकि सिख नेगी कहलाने वाले ये लोग न तो पगड़ी पहनते हैं और न ही सिखों के पांच ककार- कंघा, कड़ा, कच्छा, कृपाण और केस का पूरी तरह तरह पालन करते हैं.

सेना से रिटायर जगदीश सिंह नेगी कहते हैं, "हमें पूर्वजों से ये पता लगा है कि दयाल सिंह नाम के सरदारजी ने इस गांव को बसाया था. ये हमसे आठ-नौ पीढ़ी पहले की बात रही होगी. गांव में कुछ परिवार ब्राह्मण, ठाकुर और दलितों के भी हैं."

जगदीश सिंह नेगी कहते हैं, "पंजाब से हमने गुरु ग्रंथ साहिब मंगवाया. ये हिंदी में है. ग्रंथी भी हैं और सेवादार भी हैं. शादियों में गुरुद्वारे में आते हैं और मत्था टेकते हैं."

Monday, April 1, 2019

A股放量大涨:两市成交额再破万亿 近200股涨停

  中新网北京4月1日电 (邱宇)1日,A股全线放量大涨,深成指再上万点大关,沪指则收复3100点关口,创下11个月以来的新高。

  截至收盘,沪指收报3170.36点,涨幅2.58%;深成指收报10267.70点,涨幅3.64%;创业板指收报1760.89点,涨幅3.98%。

  两市成交额时隔15个交易日后再破1万亿,达到10440亿元。北上资金今日净流入,沪股通净流入5.64亿元,深股通净流入31.24亿元。

  盘面上,个股普涨,两市3503只个股上涨,中元股份、凯恩股份、华软科技、牧原股份等逾190只个股涨停。行业板块亦全线飘红,船舶、区块链、国产软件、猪肉等板块强势大涨,涨幅居前。

  “3月8日以来,市场进入震荡调整阶段,到目前为止,市场调整已经较为充分,部分行业已经调整到位。”长城证券策略表示,在当前位置上,仍然保持乐观,维持后续A股市场仍然可为的判断,市场在充分换手之后仍存在继续上涨的动力。

  平安证券分析称,A股市场情绪还在躁动,在宏观经济预期企稳的背景下,仍然维持看多股票市场的判断不变。当然短期波动将会有所加大,而市场资金更多会依据基本面业绩来布局。

  “四月份是上市公司年报及一季报的密集发布季,市场对于上市公司业绩的关注将显著加大,有业绩稳健及回暖确认性的上市公司将受益于市场资金的偏好。”平安证券分析指出。

  展望后市,中信证券研报称,4月下旬左右,A股在区间底部料将迎来今年第二轮上涨的最佳买点,地产产业链景气回升和大消费板块逐步启动是最重要的主线。

  “4月,A股将进入‘三期’叠加的关键窗口,包括经济和业绩的最终验证期,流动性预期的逐步宽松期;海外扰动因素的上行期。”中信证券如此表示。(完)